क्या सचिन सही बोल रहे हैं कि, भारतीय क्रिकेट की सफलता के पीछे रणजी से ज्यादा योगदान आईपीएल का है?

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Sachin Tendulkar on IPL
Photo courtesy BCCL

क्रिकेट की दुनियाँ के दिग्गज बल्लेबाज जिन्हें क्रिकेट प्रेमी भगवान का दर्जा देते हैं, जब वो कोई बात कहते हैं तो पूरी दुनियाँ उन्हें सुनती है. सचिन तेंदुलकर ने एक ऐसी बात आईपीएल और भारत के घरेलू क्रिकेट की बीच अंतर को लेकर कही है, जिससे कही न कही यह भी समझ आ रहा है कि आज की तारीख में  भारत की घरेलू क्रिकेट का कितना महत्व रह गया है. वैसे यह पहला मौका नही है, जब किसी बड़े क्रिकेटर ने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल के बीच तुलना की हो. इसके पहले भारत के पूर्व ओपनर बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग भी इन दोनों के बीच तुलना कर चुके हैं.

सचिन ने आखिर ऐसा क्या कहा.

सचिन तेंदुलकर जब कोई बात कहते हैं, तो उसके पीछे की वजह भी ठोस होती है. सचिन ने एक ऐसी ही बात आईपीएल और रणजी को लेकर कही है, जो इस समय चर्चा का विषय बनी हुई है. मौका था आईडीबीआई लाइफ इन्षुरेन्स कार्यक्रम का, जिसका आयोजन मुम्बई में किया जा रहा था. इस दौरान सचिन ने अपने वक्तव्य में इस बात की तरफ इशारा किया कि आईपीएल की वजह से आज युवाओं में यह भरोसा आता है कि वह दुनियाँ में किसी को भी चुनौती दे सकते हैं.

सचिन तेंदुलकर ने कहा कि “मुझे लगता है कि आईपीएल का जबरदस्त योगदान रहा है। इसने हमारे युवाओं को यह सोचने का अवसर दिया है कि वो यह विश्वास कर सके कि वे दुनिया में किसी के भी खिलाफ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। मुझे लगता है कि हम दुनिया में हावी होने के लिए इस समय अच्छी स्थिति में हैं। हमारे पास सही संतुलन है लेकिन कुल मिलाकर मुझे लगता है (अगर) आप आईपीएल में अच्छा करते हैं, तो हर कोई नोटिस लेता है। ”

सचिन यहीं नही रुके. उन्होंने इसके आगे रणजी ट्रॉफी, दिलीप ट्रॉफी और आईपीएल के बीच तुलनात्मक अध्ययन करने हुए कहा कि ” उन लोगों ने रणजी ट्रॉफी या दलीप ट्रॉफी में वास्तव में अच्छा प्रदर्शन किया होगा, लेकिन बाकी दुनिया इसके बारे में नहीं जानती। IPL आपको पूरी तरह से एक अलग स्तर पर ले जाता है। यह हमारी ताकत है और आईपीएल के पिछले 10 वर्षों में, हमने अधिक से अधिक युवा प्रतिभाओं को फलते-फूलते देखा है, और यह केवल इसलिए है क्योंकि सही मंच प्रदान किया गया था। ”

इसके बाद सचिन तेंदुलकर ने मयंक अग्रवाल, जसप्रीत बुमराह, कुलदीप यादव जैसे खिलाड़यों का नाम भी लिया और कहा कि ये सब इसी का ही उदाहरण है, जिनको भारतीय टीम में इस वजह से शामिल किया गया था कि, टीम में सीनियर खिलाड़यों और युवाओं का एक सही संतुलन बना रहे.

इसके पहले सहवाग भी कह चुके हैं ऐसी बात.

Sehwag on IPL
Courtesy India Today

सचिन तेंदुलकर के द्वारा कही गई बात को वीरेंद्र सहवाग ने भी बहुत पहले कहा था. इनके शब्द भी कुछ इसी तरह के थे, जिंसमे उन्होंने आईपीएल को घरेलू ट्राफी से बेहतर बताया था. सहवाग के अनुसार आईपीएल में किये गए प्रदर्शन को बहुत अहमियत दी जाती है. जो भी खिलाड़ी आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन करता है, उसे एक साल के अंदर ही भारतीय टीम में जगह मिल जाती है. वही कोई खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट में कितना भी अच्छा करे, उनको भारतीय टीम में आते-आते 5-6 साल का वक़्त लग ही जाता है.

कितनी सही है, इन दिग्गजों की बात.

इन दिग्गज खिलाड़यों की बात सुनने के बाद जब इन बातों पर विचार करते हैं, तब समझ आता है कि कही न कही इनकी बातों में सच्चाई तो है. किसी भी खिलाड़ी के चयन का एक बहुत बड़ा पैमाना आईपीएल में किया गया प्रदर्शन बन गया है. यदि हम वर्तमान भारतीय टीम को देखे तो यह बात साफ झलकती है. वर्तमान भारतीय टीम की बॉलिंग यूनिट को देखे तो प्रमुख गेंदबाजो में से एक जसप्रीत बुमराह आईपीएल की सबसे बड़ी खोजों में से एक हैं. इसके अलावा टीम में कुलदीप यादव, पृथ्वी शॉ, युजवेंद्र चहल, के एल राहुल, हार्दिक पांड्या, क्रुणाल पंड्या, मयंक अग्रवाल जैसे सभी खिलाड़ी आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन करने के कारण ही भारतीय टीम में शामिल हो पाए हैं. इसके पहले भी आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियो को इसका इनाम भारतीय टीम में शामिल करके दिया जाता था. जिंसमे संजू सैमसन, विनय कुमार जैसे खिलाड़ी हैं. यद्यपि ये खिलाड़ी टीम में अपनी जगह बरकरार नही रख पाए, और कुछ मैचों बाद इन्हें टीम से ड्राप कर दिया गया था.

आईपीएल क्यों बनता है खिलाड़ियो के चयन का आधार.

इन सब खिलाड़ियो के चयन के आधार को देखकर तो यह कहा ही जा सकता है की आज भारतीय टीम में जगह पाने के लिए आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन करना जरूरी है. लेकिन आखिर आईपीएल इतना महत्वपूर्ण क्यों हो गया है. इसका प्रश्न का जबाब खोजे तो पता चलता है कि आईपीएल में खिलाड़ियो को घरेलू क्रिकेट से ज्यादा प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है. आईपीएल में घरेलू ट्रॉफी से ज्यादा चुनौतियां होती है, और इतनी चुनौतियो से निपटने के लिये खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का अधिकतम उपयोग करते हैं, जिससे उनका प्रदर्शन ज्यादा प्रभावी बन जाता है. आईपीएल में घरेलू खिलाड़ियो को भारत के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियो के साथ तो खेलने को मिलता ही है, साथ ही दुनियाँ भर से सर्वश्रेष्ठ विदेशी खिलाड़ी भी आईपीएल में युवाओं के सामने कई चुनौती पेश करते हैं. जबकि घरेलू क्रिकेट में इन सब का अभाव होता है. अब इतने चुनौती भरे लीग में जब कोई भी खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करता है, तो सभी का ध्यान उस खिलाड़ी पर जाना तो लाजमी है.

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